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| Baba Neem Karoli Ashram - Nainital |
बाबा नीम करौली महाराज कौन थे?
Neem Karoli Baba जिन्हें भक्त प्रेम से “हनुमान भक्त ” भी कहते हैं, भारत के प्रसिद्ध संतों में से एक थे। उनका जन्म सन् 1900 ईस्वी के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम श्री लक्ष्मण दास शर्मा था। बाबा जी हनुमान जी के परम भक्त थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन सेवा, प्रेम और भक्ति में समर्पित कर दिया।
बाबा नीम करौली महाराज ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन धाम में समाधि ग्रहण की। आज भी वृंदावन स्थित उनके पावन समाधि स्थल पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के समाधि स्थल मंदिर वृंदावन ओर केची धाम आश्रम नैनीताल दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुँचते हैं।”
देश-विदेश से लाखों लोग बाबा नीम करौली दर्शनों के लिए पहुचते है। कहा जाता है कि उनके आशीर्वाद से लोगों के जीवन की परेशानियाँ दूर होती है । कैंची धाम आश्रम पहुचते ही भक्तों को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
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| Neem Karoli Baba |
कैंची धाम का इतिहास
कैंची धाम आश्रम की स्थापना वर्ष 1964 में Neem Karoli Baba द्वारा की गई थी। यहाँ हनुमान जी का भव्य मंदिर स्थित है और यह स्थान बाबा की प्रमुख तपोभूमि माना जाता है, जहाँ उन्होंने अपने जीवन का काफी समय साधना, सेवा और भक्तों के मार्गदर्शन में बिताया।
पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसे Kainchi Dham Ashram पहुँचते ही भक्तों को अद्भुत शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण का अनुभव होता है। हर साल 15 जून को यहाँ आश्रम स्थापना दिवस और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
भक्तों का मानना है कि बाबा नीम करौली महाराज जहाँ भी जाते थे, वहाँ लोगों के दुख और परेशानियाँ दूर हो जाती थीं। उनके चमत्कारों और कृपा की अनेक कथाएँ आज भी श्रद्धालुओं के बीच आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई हैं।
आखिर कैंची धाम नाम कैसे पड़ा?
कैंची धाम का नाम वहाँ की दो पहाड़ियों के कैंची (Scissor) जैसी आकृति के कारण पड़ा। यह जगह प्राकृतिक सुंदरता, शांति और आध्यात्मिक वातावरण के लिए बहुत प्रसिद्ध है।
बाबा का “नीम करौली बाबा” नाम कैसे पड़ा?
Neem Karoli Baba का असली नाम लक्ष्मण दास शर्मा बताया जाता है। उन्हें “नीम करौली बाबा” नाम उत्तर प्रदेश के एक गाँव नीब करौरी (Neeb Karori) के कारण पड़ा ।
कहा जाता है कि बाबा जी कुछ समय तक उस गाँव में रहे थे और वहाँ बाबा ने साधना ओर भक्तों का मार्गदर्शन किया। धीरे-धीरे लोग उन्हें उस गाँव के नाम से पहचानने लगे और वे “नीम करौली बाबा” कहलाने लगे।
“नीम करौली बाबा” नाम के पीछे की रोचक कथा
एक प्रसिद कथा के अनुसार एक बार Baba Neem Karoli रेल यात्रा कर रहे थे। उस समय टिकट न होने के कारण रेलवे कर्मचारी ने बाबा को नीब करौरी गाँव के पास एक छोटे से स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार दिया। बाबा जी बिना किसी विरोध के शांत भाव से प्लेटफॉर्म पर बैठ गए।
कहा जाता है कि जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ने लगी, वह अचानक रुक गई। काफी प्रयासों के बाद भी ट्रेन चल नहीं सकी। रेलवे अधिकारियों और यात्रियों को यह एक अद्भुत घटना लगी। बाद में जब स्थानीय लोगों ने बाबा जी के बारे मे बताया तो सभी ने विनम्रता पूर्वक क्षमा माँगी और उन्हें पुनः ट्रेन में बैठाया, उसके बाद ट्रेन तुरंत चल पड़ी।
इस घटना के बाद बाबा जी की महिमा और चमत्कारों की चर्चा तेजी से फैलने लगी। धीरे-धीरे लोग उन्हें उस स्थान के नाम से “नीम करौली बाबा” कहकर पुकारने लगे। आज भी यह कथा भक्तों के बीच गहरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सुनाई जाती है।
बाबा नीम करौली आश्रम जाने वाले वाले प्रसिद्ध लोग
दुनिया की कई बड़ी हस्तियाँ भी बाबा जी से प्रभावित रही हैं:
- Ram Dass (आध्यात्मिक गुरु और लेखक)
- Krishna Das (भजन गायक)
- Larry Brilliant (डॉक्टर और वैज्ञानिक)
- Bhagavan Das (योग गुरु और आध्यात्मिक शिक्षक)
- Steve Jobs (एप्पल कंपनी के सह-संस्थापक)
- Mark Zuckerberg (मेटा / फेसबुक के सीईओ)
कहा जाता है कि कठिन समय में ये लोग भी कैंची धाम आए थे और यहाँ से उन्हें नई दिशा मिली।
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कैंची धाम आश्रम कैसे जाएँ?
- हवाई मार्ग से
अगर आप हवाई मार्ग से से जाना चाहते है तो यह का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट Pantnagar Airport है, जो कैंची धाम से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुँच सकते है।
- रेल मार्ग से
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन:
- Kathgodam Railway Station – लगभग 38 किमी
- Haldwani Railway Station – लगभग 45 किमी
रेलवे स्टेशन से शेयर टैक्सी, बस और निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। वहाँ से कैंची धाम पहुँचने में लगभग 1 से 1.5 घंटे का समय लग सकता है।
- सड़क मार्ग से
दिल्ली, हल्द्वानी, नैनीताल और अल्मोड़ा से कैंची धाम के लिए नियमित बस और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं।
दिल्ली से दूरी
लगभग 320 किलोमीटर
हल्द्वानी से दूरी
लगभग 45 किलोमीटर
कैंची धाम में रुकने की व्यवस्था
कैंची धाम के आसपास कई होटल, गेस्ट हाउस और डोरमेट्री उपलब्ध हैं। वीकेंड ओर मंगलवार अक्सर यह भीड़ होती है तो इससे बचने के लिए पहले से बुकिंग करना बेहतर रहता है।
भक्त उन्हें किन नामों से बुलाते हैं?
- नीम करौली बाबा
- महाराज जी
- नीब करौरी बाबा
- हनुमान भक्त बाबा
उनके भक्त मानते हैं कि बाबा जी आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और सच्चे मन से याद करने पर कृपा करते हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. कैंची धाम कहाँ स्थित है?
A. कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है।
Q2. बाबा नीम करौली कौन थे?
A. वे हनुमान जी के परम भक्त और प्रसिद्ध संत थे।
Q3. कैंची धाम जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
A. मार्च से जून और सितंबर से नवंबर।
Q4. कैंची धाम में भंडारा कब होता है?
A. हर वर्ष 15 जून को।
Q5. कैंची धाम का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?
A. काठगोदाम रेलवे स्टेशन।



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