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हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से मुक्त कराया |
जब हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से मुक्त कराया
हिन्दू धर्म में हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से उनकी भक्ति करता है, उसके जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि शनिवार के दिन शनिदेव जी के साथ साथ हनुमान जी की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसमें हनुमान जी ने शनिदेव जी को रावण की कैद से मुक्त कराया था।
रावण ने शनिदेव को क्यों बंदी बनाया?
रावण केवल एक शक्तिशाली राजा ही नहीं बल्कि बहुत बड़ा विद्वान और ज्योतिष का ज्ञाता भी था। वह जानता था कि शनिदेव की दृष्टि किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
कहा जाता है कि जब रावण का पुत्र मेघनाद जन्म लेने वाला था, तब रावण चाहता था कि सभी ग्रह उसके अनुसार रहें ताकि उसका पुत्र अत्यंत शक्तिशाली और अजेय बने। उसने कई ग्रहों को अपने वश में कर लिया था ।
लेकिन मेघनाद के जन्म के समय शनिदेव ने अपनी स्थिति बदल दी, जिससे रावण अत्यंत क्रोधित हो गया और उसने शनिदेव को लंका में बंदी बना लिया।
जब हनुमान जी लंका पहुँचे
जब हनुमान जी माता सीता की खोज में समुद्र पार करके लंका पहुँचे, तब उन्होंने पूरे नगर में खोज शुरू की। उसी दौरान उन्हें एक अंधेरी कारागार से कराहने की आवाज सुनाई दी।
हनुमान जी वहाँ पहुँचे तो देखा कि शनिदेव कैद में हैं। शनिदेव ने हनुमान जी को बताया कि रावण ने उन्हें बंदी बना रखा है।
शनिदेव ने कहा:
“हे पवनपुत्र! रावण के अहंकार के कारण मैं यहाँ कैद हूँ। कृपया मुझे इस बंधन से मुक्त कर दीजिए।”
हनुमान जी ने तोड़ दी कैद
हनुमान जी ने तुरंत अपनी शक्ति से कारागार के बंधन तोड़ दिए और शनिदेव को मुक्त कर दिया। शनिदेव हनुमान जी की शक्ति, साहस और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए।
मुक्त होने के बाद शनिदेव ने हनुमान जी से प्रसन्न होकर कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से आपका स्मरण करेगा तथा आपकी आराधना करेगा, उसे शनि के कठोर प्रभावों से राहत मिलेगी ओर उस पर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी।।
इसी कारण आज भी माना जाता है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष शांत होते है।
लंका दहन और शनिदेव की दृष्टि
एक मान्यता यह भी है कि जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई, तब शनिदेव ने भी रावण के अत्याचारों से क्रोधित होकर लंका पर अपनी दृष्टि डाली। इसी कारण लंका का विनाश और भी तेज हो गया।
शनिवार को हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है?
इस कथा के बाद से यह मान्यता प्रचलित हुई कि:
- शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष कम होता है।
- साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।
- भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
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शनिवार को क्या करें?
- हनुमान चालीसा का पाठ
- शनिवार को सुबह या शाम हनुमान चालीसा पढ़ना शुभ माना जाता है।
- सरसों के तेल का दीपक
- हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- सुंदरकांड का पाठ
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड पढ़ने से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- गरीबों को दान
- काले तिल, उड़द दाल और तेल का दान शनिवार को शुभ माना जाता है।
इस कथा का महत्व
- अहंकार का अंत निश्चित है।
- सच्ची भक्ति सबसे बड़ी शक्ति है।
- भगवान के सच्चे भक्त की रक्षा स्वयं देवता भी करते हैं।

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