हनुमान चालीसा: सम्पूर्ण जानकारी, पाठ विधि, महत्व और लाभ

hanuman chalisa
Shri Hanuman Ji

श्री हनुमान जी हिंदू धर्म में कलयुग में पूजे जाने वाले सबसे शक्तिशाली और लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। उनकी भक्ति करने से भय, दुख और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी आज भी कलयुग में जीवित हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हुए कलयुग के अंत तक पृथ्वी पर ही विराजमान रहेंगे ।  हनुमान चालीसा एक पवित्र स्तोत्र (भक्ति गीत) है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने 1576 ईस्वी में की थी। इसमें 40 चौपाइयाँ होती हैं, इसलिए इसे "चालीसा" कहा जाता है।

हनुमान जी की भक्ति का सबसे शक्तिशाली स्तोत्र

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया एक भक्ति गीत है, जो व्यक्ति को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की अमर रचना है।

हनुमान चालीसा का पूरा पाठ - हिन्दी अर्थ सहित


॥ जय श्री राम ॥

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि। 
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। 
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
         (हिन्दी अर्थ )
गुरु के चरणों की धूल से मन को पवित्र करके, मैं श्रीराम के यश का वर्णन करता हूँ।
मैं खुद को बुद्धिहीन मानकर हनुमान जी से ज्ञान और शक्ति की प्रार्थना करता हूँ।


॥ चौपाई॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ {01}
(हिन्दी अर्थ )
हे हनुमान जी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं।
आप श्रीराम के दूत और अपार शक्ति के धाम हैं।


राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ {02}
(हिन्दी अर्थ) 
आप अत्यंत वीर और वज्र जैसे मजबूत हैं।
आप बुरी बुद्धि को दूर करके अच्छी बुद्धि देते हैं।


महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥ {03}
(हिन्दी अर्थ)
आपका शरीर स्वर्ण जैसा चमकदार है और सुंदर वस्त्र पहने हैं।
आप कानों में कुंडल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥ {04}
(हिन्दी अर्थ)
आपके हाथ में वज्र और ध्वजा है, कंधे पर जनेऊ है।
आप शिव जी के अंश हैं और अत्यंत तेजस्वी हैं।

हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे।
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥ {05}
(हिन्दी अर्थ)
आपके हाथ में वज्र और ध्वजा है, कंधे पर जनेऊ है।
आप शिव जी के अंश हैं और अत्यंत तेजस्वी हैं।

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥ {06}
(हिन्दी अर्थ)
आपकी बुद्धि, बल और विद्या की दुनिया में प्रशंसा होती है।
आप राम जी के कार्यों को करने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥ {07}
(हिन्दी अर्थ)
आप विद्वान, गुणवान और अत्यंत चतुर हैं। 
आप श्रीराम के कार्यों को करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥ {08}
(हिन्दी अर्थ)
आप भगवान श्रीराम के चरित्र सुनने के प्रेमी हैं और श्रीराम, 
लक्ष्मण, और सीता के हृदय में बसे हुए हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥ {09}
(हिन्दी अर्थ )
आपने अपना सूक्ष्म रूप धारण कर सीता माता को दिखाया, 
और विशाल रूप धारण कर लंका को जला दिया।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे॥ {10}
(हिन्दी अर्थ)
आपने भीषण रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया 
और श्रीराम के कार्यों को सफल बनाया।

लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुवीर हरषि उर लाए॥ {11}
(हिन्दी अर्थ)
आपने समुद्र पार करके महान कार्य किया।
आपने लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी लाकर उनकी जान बचाई।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ {12}
(हिन्दी अर्थ)
रघुनाथजी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा 
कि आप मेरे लिए भरत के समान प्रिय हैं।

सहस बदन तुम्हारो जस गावे।
अस कही श्रीपति कंठ लागवे ॥ {13}
(हिन्दी अर्थ) 
हजारों मुख वाले शेषनाग आपका यश गाते हैं, 
ऐसा कहकर श्रीराम ने आपको अपने गले से लगा लिया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥ {14}
(हिन्दी अर्थ)
ब्रह्मा, मुनी, नारद, 
सरस्वती और शेषनाग - सभी आपके गुण गाते हैं।

यम कुबेर दिगपाल जहां ते । 
कबि कोबिद कहि सके कहां ते ॥ {15}
(हिन्दी अर्थ )
यमराज, कुबेर और दिग्पालक (10 दिशाओं के देवता) भी आपकी महिमा का वर्णन नहीं कर पाए हैं। 
फिर कवि, कोविद (वेदों के ज्ञानी, वेदज्ञ) और विद्वान् आपका पार कहाँ पा सकते हैं।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । 

राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥ {16}
(हिन्दी अर्थ)
आपने सुग्रीव को प्रभु श्री राम जी से मिलवाकर बड़ा उपकार किया 
और उन्हें राजा का पद दिलवाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । 
लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ {17}
(हिन्दी अर्थ)
आपके उपदेशों का विभीषण ने भी पालन किया 
जिससे वे लंका का राजा हुए। यह पूरा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू । 
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ {18}
(हिन्दी अर्थ)
आपने सूर्यदेव को मीठा फल समझकर निगल लिया 
जो हजार युग योजन दूरी पर हैं।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । 
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ॥ {19}
(हिन्दी अर्थ)
यह कोई आश्चर्य की बात नहीं जो आपने प्रभु श्रीराम की अंगूठी को 
अपने मुख में रखकर 100 योजन का समुद्र लांघ लिया।

दुर्गम काज जगत के जेते । 
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ {20}
(हिन्दी अर्थ)
आपकी कृपा से संसार के सभी 
जटिल कार्य सरल हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ {21}
(हिन्दी अर्थ) 
आप श्रीराम के द्वार के रखवाले हैं, 
आपकी आज्ञा के बिना कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥ {22}
(हिन्दी अर्थ)
आपकी शरण में आने से सभी सुख प्राप्त करते हैं। आप रक्षक हैं, 
तो फिर किसी को डर किस बात का

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक ते काँपै॥ {23}
(हिन्दी अर्थ)
आपने अपने तेज को स्वयं ही नियंत्रित कर रखा है, 
लेकिन आपकी हाँक से तीनों लोक काँपते हैं।

भूत पिशाच निकट नहीं आवै।
महावीर जब नाम सुनावै॥ {24}
(हिन्दी अर्थ) 
जहाँ महावीर हनुमान का नाम लिया जाता है, 
वहाँ भूत-पिशाच निकट नहीं आ सकते।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ {25}
(हिन्दी अर्थ)
वीर हनुमान के नाम का जप करने से 
रोग और पीड़ा नष्ट हो जाती हैं।

संकट ते हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥ {26}
(हिन्दी अर्थ)
जो भी मन, वचन, और कर्म से ध्यान लगाते हैं, 
हनुमानजी उन्हें सभी संकटों से मुक्त कर देते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥ {27}
(हिन्दी अर्थ )
तपस्वी राजा श्रीराम का काम आपने पूरा किया, 
जिससे आपका यश चारों ओर फैल गया।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥ {28}
(हिन्दी अर्थ)
जो कोई भी अपनी इच्छाओं को लेकर आपके पास आता है, 
वह अनंत जीवन के फल प्राप्त करता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥ {29}
(हिन्दी अर्थ)
चारों युगों में आपका प्रताप फैला हुआ है, 
और आपकी महिमा सारे संसार में उजागर है।

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥ {30}
(हिन्दी अर्थ)
आप साधु-संतों के रक्षक हैं, 
असुरों का संहार करने वाले और श्रीराम के प्रिय हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन्ह जानकी माता॥ {31}
(हिन्दी अर्थ)
आप आठों सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं, 
यह वरदान आपको माता जानकी ने दिया है।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥ {32}
(हिन्दी अर्थ)
आपके पास राम-नाम अमृत का भंडार है, 
जिससे आप सदा रघुनाथजी के सेवक बने रहते हैं। {33}

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥ {33}
(हिन्दी अर्थ)
आपके भजन से श्रीराम प्राप्त होते हैं, 
और जन्म-जन्मांतर के दुखों का नाश हो जाता है।

अंतकाल रघुवर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ {34}
(हिन्दी अर्थ)
अंत समय में भक्त को श्रीराम का धाम प्राप्त होता है, 
जहाँ वह जन्म लेता है, वहाँ वह हरि-भक्त कहलाता है।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ {35}
(हिन्दी अर्थ)
अन्य देवताओं का ध्यान ना करके आप, 
केवल हनुमानजी की सेवा से सभी सुख प्राप्त होते हैं।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ {36}
(हिन्दी अर्थ)
जो हनुमानजी का स्मरण करते हैं, 
उनके सभी संकट और पीड़ाएँ दूर हो जाती हैं।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ {37}
(हिन्दी अर्थ)
जो हनुमानजी का स्मरण करते हैं, 
उनके सभी संकट और पीड़ाएँ दूर हो जाती हैं।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥ {38}
(हिन्दी अर्थ)
जो कोई भी इस चालीसा का सौ बार पाठ करता है, 
वह सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे महान सुख प्राप्त होता है।

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ {39}
(हिन्दी अर्थ)
जो भी इस हनुमान चालीसा का पाठ करता है, 
उसे सिद्धि प्राप्त होती है, और शिवजी इसके साक्षी हैं।

तुलसीदास सदा हरि चेरा। 
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ {40}
(हिन्दी अर्थ)
तुलसीदासजी सदा भगवान श्रीराम के सेवक रहे हैं। हे नाथ, 
कृपया मेरे हृदय में निवास करें।

दोहा:
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। 
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
(हिन्दी अर्थ)
हे पवनपुत्र, संकटों का नाश करने वाले, मंगलमूर्ति हनुमानजी, 
कृपया आप राम, लक्ष्मण और सीता के साथ मेरे हृदय में निवास करें।


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हनुमान चालीसा पढ़ने के लाभ

  • नकारात्मक ऊर्जा और डर दूर होता है
  • आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है
  • ग्रह दोष और शनि की बाधा कम होती है
  • मानसिक शांति और एकाग्रता मिलती है
  • जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं


हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे) 
  • शाम के समय 
  • खासकर मंगलवार और शनिवार को पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है 


पाठ करने की सही विधि

  • स्नान करके साफ कपड़े पहनें 
  • हनुमान जी की मूर्ति या फोटो के सामने बैठें 
  • दीपक और अगरबत्ती जलाएं 
  • ध्यान लगाकर श्रद्धा से पाठ करें 
  • अंत में आरती करें 


हनुमान जी से जुड़ी खास बातें

  • हनुमान जी को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है 
  • इन्हें "संकट मोचन" कहा जाता है 
  • ये अमर (चिरंजीवी) माने जाते हैं 


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1.  हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

A.  1, 7, 11 या 108 बार पढ़ना शुभ माना जाता है।

Q2. क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?

 A.  हां, कोई भी श्रद्धा से पढ़ सकता है।

Q3. हनुमान चालीसा से क्या फायदा होता है?

 A.  डर, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।


हनुमान चालीसा केवल एक पाठ नहीं बल्कि एक शक्तिशाली साधना है। यदि आप इसे नियमित रूप से श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ते हैं, तो जीवन की कई समस्याओं का समाधान मिल सकता है।


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